Kabeer Granthavali (Sateek) (Record no. 1675)
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| 000 -LEADER | |
|---|---|
| fixed length control field | 03928nam a22001457a 4500 |
| 020 ## - INTERNATIONAL STANDARD BOOK NUMBER | |
| ISBN | 9788180317798 |
| 082 ## - DEWEY DECIMAL CLASSIFICATION NUMBER | |
| Classification number | 891 |
| Item number | SHA |
| 100 ## - MAIN ENTRY--AUTHOR NAME | |
| Personal name | Sharma, Ramkishor |
| 245 ## - TITLE STATEMENT | |
| Title | Kabeer Granthavali (Sateek) |
| 250 ## - EDITION STATEMENT | |
| Edition statement | 12th ed. |
| 260 ## - PUBLICATION, DISTRIBUTION, ETC. (IMPRINT) | |
| Place of publication | Prayagraj |
| Name of publisher | Lokbharti |
| Year of publication | 2019 |
| 300 ## - PHYSICAL DESCRIPTION | |
| Number of Pages | 688p. |
| 500 ## - GENERAL NOTE | |
| General note | कबीर निर्गुण सन्त काव्यधारा के ऐसे शब्द-साधक हैं जिन्होंने अपने युग की धार्मिक, सामाजिक एवं राजनीतिक व्यवस्था से टकराकर अद्भुत शक्ति प्राप्त की। पारम्परिक सांस्कृतिक प्रवाह में सम्मिलित प्रदूषित तत्त्वों को छानकर उसे मध्यकाल के लिए ही आस्वादनीय नहीं, बल्कि आधुनिक जनमानस के लिए भी उपयोगी बना दिया। भारतीय धर्म साधना में ऐसा निडर तथा अकुंठित व्यक्तित्व विरला है।<br/><br/>पंडितों, मौलवियों, योगियों आदि से लोहा लेकर कबीर ने जनसाधारण के स्वानुभूतिजन्य विचारों और भावों की मूल्यवत्ता स्थापित की। कबीर की वाणी सन्त-कंठ से निसृत होकर साधकों, अनुयायियों एवं लोक-जीवन में स्थान एवं रुचि भेद के अनुसार विविध रूपों में परिणत हो गई। इसलिए कबीर की वाणी के प्रामाणिक पाठ निर्धारण की जटिल समस्या कड़ी हो गई।<br/><br/>कबीर पन्थ में बीजक की श्रेष्ठता मान्य है, विद्वानों ने ग्रन्थावलियों को महत्त्व दिया है। सामान्य जन के लिए लोक में व्याप्त कबीर वाणी ग्राह्य है। अतः तीनों परम्पराओं में से किसी को भी त्यागना उचित नहीं है। फलत: कबीर की रचनाओं का समग्र रूप तीनों के समाहार से ही सम्भव है। प्रस्तुत ग्रन्थावली का सम्पादन इसी दृष्टि से किया गया है। मूल पाठ के साथ कबीर की मूल साधना तथा मन्तव्य के अनुकूल भाष्य प्रस्तुत किया गया है। इसमें अपनी इच्छित दिशा में आवश्यकता से अधिक खींचकर पाठकीय सोच को कुंठित करने की चेष्टा नहीं की गई है। कबीर-वाणी के प्रामाणिक एवं समग्र पाठ की दृष्टि से तथा उसमें निहित विचारों, भावों एवं अनुभूतियों को उद्घाटित करने की दृष्टि से यह कृति निश्चित ही महत्त्वपूर्ण एवं संग्रहणीय है। |
| 942 ## - ADDED ENTRY ELEMENTS (KOHA) | |
| Koha item type | Degree College Books |
| Withdrawn status | Lost status | Not for loan | Collection code | Home library | Current library | Shelving location | Date acquired | Source of acquisition | Cost, normal purchase price | Inventory number | Full call number | Accession Number | Cost, replacement price | Non-public note | Koha item type | Public note |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Hindi Books | Thakur Ramnarayan College of Arts and Commerce | Thakur Ramnarayan College of Arts and Commerce | Library | 10/29/2022 | Paridrishya Prakashan | 315.00 | 14352 | 891 SHA | SR2424 | 350.00 | 10% | Degree College Books | Order By Binita Jha |